
भारत सैटेलाइट तकनीक में अपना लोहा मनवा चुका है। और अब एडवांस्ड ऑप्टिकल पेलोड्स के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, केवल इसरो ही नहीं बल्कि EON Space Labs जैसे स्टार्टअप्स भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
दरअसल, सेटेलाइट की आंखों का काम करने वाले electro-optical sensors, अलग-अलग वेवलेंथ में धरती की तस्वीरें लेने में मदद करते हैं। इन्हीं तस्वीरों की मदद से बाढ़ की पहले से चेतावनी दी जा सकती है, खेती की बेहतर योजना बनाई जा सकती है, जंगल की आग पर नज़र रखी जा सकती है और आपदा के समय राहत कार्यों में मदद मिलती है।
परंतु ऐसे एडवांस्ड ऑप्टिकल पेलोड्स और सेंसर अक्सर विदेशों से मंगवाए जाते हैं। इसी कमी को पूरा करने के लिए 2022 में, तीन इंजीनियरों ने EON Space Labs की शुरुआत की । ये तीनों इंजीनियर पहले आंखों के इलाज से जुड़ी तकनीक पर काम करते थे, अब स्पेस टेक्नोलॉजी के लिए मोनोलिथिक ऑप्टिक्स में अपने अनुभव और ज्ञान का विस्तार कर रहे हैं।
EON Space Labs ने अपने सिस्टम का लगभग 90% हिस्सा देश में ही बनी तकनीक से तैयार किया है। कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट MIRA नाम का एक छोटा स्पेस टेलीस्कोप है, जिसका वज़न लगभग 500 ग्राम है। और इसे इसी साल 2026 तक लॉन्च करने की योजना है।
इसके अलावा, कंपनी ने LUMIRA नाम का एक थर्मल ड्रोन कैमरा भी बनाया है। जो 2 किलोमीटर दूर से इंसानों और 8 किलोमीटर दूर से वाहनों को पहचान सकता है। यह तकनीक AI की मदद से काम करती है, और इसकी ख़ास बात यह है कि यह रात में या खराब मौसम में भी साफ़ तस्वीरें देख सकती है। भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के ऐसे ही प्रयास भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकते हैं।

