NASA ने अंतरिक्ष में घूम रही स्विफ़्ट ऑब्ज़र्वेटरी को बचाने के लिए एक अनोखे मिशन को लांच किया है। स्विफ़्ट बूस्ट नाम के इस मिशन का मकसद है, स्विफ़्ट ऑब्जर्वेटरी के लगातार छोटे हो रहे ऑर्बिट को फिर से बड़ा करना।
साल 2004 में लॉन्च की गई Neil Gehrels Swift Observatory में 3 मल्टीवेवलेंथ टेलीस्कोप लगे हुए हैं, जो अंतरिक्ष से अलग-अलग तरह की रोशनी का डेटा इकट्ठा करते हैं। साथ ही, यह कुछ ही मिनटों में अपनी दिशा बदलकर गामा-रे विस्फोट और विस्फोटित तारों जैसी अचानक होने वाली खगोलीय घटनाओं का अध्ययन कर सकती है।
2 साल के लिए बनाई गई यह ऑब्ज़र्वेटरी, 20 साल बाद भी अपनी इन्हीं विशेषताओं के चलते खगोल वैज्ञानिकों के लिए अहम है।
परंतु समस्या यह है, कि सौर गतिविधि में वृद्धि के कारण पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल फैल गया है। और अतिरिक्त वायुमंडलीय खिंचाव पैदा होने से स्विफ़्ट का ऑर्बिट लगभग 600 किलोमीटर से घट कर, 360 किलोमीटर तक ही रह गया है।
अगर यह ऑर्बिट 300 किलोमीटर तक आ गया तो इस महत्वपूर्ण ऑब्ज़र्वेटरी को पृथ्वी के वायुमंडल में जलने से बचाना मुश्किल हो जाएगा।
इसलिए नासा ने Katalyst Space Technologies द्वारा बनाए गए रोबोटिक अंतरिक्ष यान LINK को Marshall Islands से लॉन्च किया। भारतीय समय अनुसार यह लॉन्च 3 जुलाई दोपहर लगभग 2 बजकर 6 मिनट पर हुआ।
अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद LINK, Swift के पास पहुंच कर, उसे अपने रोबोटिक हाथों से पकड़ेगा और उसकी कक्षा को फिर से ऊंचा करने का प्रयास करेगा।
अगर यह मिशन सफल रहता है, तो भविष्य में पुराने उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों की मरम्मत, उनमें ईंधन भरने और उन्हें नई कक्षा में पहुंचाने जैसे काम अंतरिक्ष में ही किए जा सकेंगे।

