कल्पना कीजिए पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर एक ऐसी सैटेलाइट बेस्ड फैक्ट्री की…, जो अंतरिक्ष में बिना किसी इंसानी मदद के दवाइयां बनाएं, उन्हें टेस्ट करे, और फिर उन्हें धरती पर सुरक्षित ले भी आए। और इस रीयूज़ेबल फैक्ट्री का इस्तेमाल बार-बार किया जा सके…
इसी कल्पना को सच बना रही है, भुवनेश्वर स्थित स्पेस टेक स्टार्टअप – सेरेंडिपिटी स्पेस। लगभग एक महीने पहले यह कंपनी ऐसे उपग्रह के नमूने का सफल परीक्षण कर चुकी है।
हैदराबाद के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की बैलून सुविधा से किए गए इस प्रशिक्षण में, गुब्बारे की मदद से उपग्रह को अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों में भेजा गया। इस उपग्रह में मौजूद Alchemy नाम की ऑटोनॉमस फार्मास्यूटिकल फैक्ट्री ने कठिन परिस्थितियों में लगातार काम करते हुए दवा बनाकर उसे secure किया। और जब सैटेलाइट को धरती पर दोबारा लाया गया, तो यह दवाई सुरक्षित रूप से प्राप्त भी की गई।
दवाइयां असल में तभी सबसे ज़्यादा असरदार होती हैं जब उनके क्रिस्टल एक सार बने हुए हों, स्थिर हों, और पूरी तरह से घुल भी सकें। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर हुए कई प्रयोगों ने यह साबित किया है कि ग्रेविटी के अभाव में दवाइयां के क्रिस्टल बेहतर और नए तरीके से बनाए जा सकते हैं।
परंतु इस ज्ञान का फ़ायदा तभी है जब ऐसी दवाइयां ज़रूरत के अनुसार, ज़्यादा मात्रा में बनाई जा सकें और सुविधा अनुसार धरती पर प्राप्त भी की जा सकें। सेरेनडिपिटी स्पेस ने इसी चुनौती को हल करते हुए को ऑटोनॉमस फार्मास्यूटिकल फैक्ट्री और रीयूजे़बल सैटेलाइट का निर्माण किया है।
यह भविष्य के उन अंतरिक्ष कारखानों की पहली सीढ़ी है, जहाँ धरती के मुक़ाबले बेहतर सामग्री और उत्पाद बनाए जा सकेंगे।

