
16 जून 1963 को रूस की वैलेंटिना टेरेश्कोवा अंतरिक्ष मे जाने वाली दुनिया की पहली महिला बनीं और आज उनकी इस एतिहासिक उड़ान के 63 साल पूरे हो गए हैं। वैलेंटिना टेरेश्कोवा का जन्म रूस के एक छोटे से गाँव में हुआ। उन्होंने जल्दी स्कूल छोड़ दिया और textile mill में काम करने लगीं।
परंतु काम के साथ उन्होंने अपने पैराशूटिंग के शौक़ को जारी रखा, जिसके चलते वह 100 से ज्यादा बार पैराशूट से सफलतापूर्वक कूद चुकीं थीं। उनके इसी कौशल से प्रभावित होकर उन्हें सोवियत स्पेस प्रोग्राम के लिए चुना गया।
दरअसल, उस वक्त वोस्तोक अंतरिक्ष यान में सॉफ्ट-लैंडिंग प्रणाली नहीं थी। इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को तेज़ी से गिरते कैप्सूल से बाहर निकलना पड़ता था, और अंतिम 4 मील की दूरी पैराशूट से तय करनी पड़ती थी।
साल 1962 में उन्हें इस प्रोग्राम के लिए चुना गया और एक साल की ट्रेनिंग के बाद, 16 जून 1963 को, उनके अंतरिक्ष यान वोस्तोक-6 ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। वैलेंटिना लगभग तीन दिन तक अंतरिक्ष में रहीं और पृथ्वी के 48 चक्कर लगाए। इस दौरान एक तकनीकी समस्या भी आई, लेकिन उनकी समझदारी से मिशन सुरक्षित रहा।
आज भी वैलेंटिना टेरेश्कोवा दुनिया की अकेली ऐसी महिला हैं, जिन्होंने अकेले अंतरिक्ष यात्रा की है। उनकी कहानी आज भी बहुत लोगों, खासकर महिलाओं, को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती है।

