अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट और दूसरी वस्तुओं पर नज़र रखने के लिए भारत अपनी निगरानी क्षमता को और मज़बूत करने जा रहा है। इसके लिए असम के चंद्रपुर में ISRO का Advanced Radar Research Centre बनाया जा रहा है, जो पूर्वोत्तर भारत में इस तरह का पहला केंद्र होगा। लगभग 70 एकड़ ज़मीन पर बनने वाले इस केंद्र का शिलान्यास इसी हफ्ते 21 सितंबर 2026 को किया गया।
प्रोजेक्ट नेत्रा के तहत बनने वाले इस केंद्र के ज़रिए अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट, अंतरिक्ष मलबे, और दूसरी वस्तुओं के स्थान, दिशा, और गति पर नज़र रखी जा सकेगी। इससे ISRO अपने उपग्रहों के लिए संभावित ख़तरों का आकलन कर सकेगा, और भविष्य में होने वाले अंतरिक्ष अभियानों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
इस केंद्र का सबसे अहम हिस्सा Phased Array Radar होगा, जिसमें कई छोटे एंटीना एक साथ काम करते हैं। इसकी मदद से रडार को घुमाए बिना अलग-अलग दिशाओं में मौजूद वस्तुओं पर नज़र रखी जा सकती है।
यह रडार करीब 10 सेंटीमीटर तक छोटी वस्तुओं को 2,000 किलोमीटर की दूरी तक ट्रैक कर सकेगा। ख़राब मौसम या कम रोशनी में भी रडार की मदद से अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं पर नज़र रखी जा सकेगी।
परंतु यह केंद्र सिर्फ अंतरिक्ष की निगरानी के लिए ही नहीं है। यहां बारिश, बादलों और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए भी रडार लगाए जाएंगे, जिससे मौसम और आपदा निगरानी में भी मदद मिलेगी।

