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बर्फ़ के नीचे से ब्रह्मांड के ‘भूतिया कणों’ की खोज को मिला 2026 का फिज़िक्स नोबेल

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1980 के दशक में अगर कोई यह कहे कि ब्रह्मांड के भूतिया कण को पकड़ने के लिए अंटार्कटिका की बर्फ़ में दबा हुआ एक टेलिस्कोप बनाना चाहिए, तो संभव था कि लोग इसे एक सनकी विचार समझकर नकार देते।

परंतु अमेरिका की National Science Foundation ने बेल्जियन मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्ज़ेन के इस असंभव आइडिया पर दांव खेला, और कुछ ही वर्षों में 14 देशों के 450 से ज़्यादा लोग हाल्ज़ेन के नेतृत्व में इस एडवेंचर पर निकल पड़े। फ्रांसिस हाल्ज़ेन को इसी एडवेंचर और इसकी उपलब्धियों के लिए इस साल भौतिकी के नोबेल के लिए चुना गया है।

इस कहानी का हीरो है- न्यूट्रिनो,जिसे घोस्ट मेसेंजर या भूतिया कण कहा जाता है। हर सेकंड अरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर से गुज़रते हैं। बिना चार्ज के ये कण धरती के भीतर से भी सीधे गुज़र जाते हैं और किसी भी पदार्थ के साथ इनकी इंटरेक्शन या टक्कर बड़ी दुर्लभ होती है। पर अगर हम न्यूट्रिनो की दुर्लभ टक्कर को डिटेक्ट कर सकें तो हमें पता चल सकता है कि वो ब्रह्मांड में कहां से आया है।

इसलू न्यूट्रिनो की दुर्लभ टक्कर को डिटेक्ट करने के लिए  अंटार्कटिका की बर्फ़ का इस्तेमाल सोचा गया जो बिना किसी डिस्टरबेंस के एक विशाल और पारदर्शी मीडियम प्रदान करती है।

2011 में बन कर तैयार हुई आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में 2 किलोमीटर नीचे, एक घन किलोमीटर बर्फ़ में, 5160 सेंसर्स लगाए गए। जब अरबों में से कोई एक न्यूट्रिनो बर्फ़ से टकराता है तो एक हल्की नीली रोशनी (चेरेनकोव रेडिएशन) पैदा होती है, जिसे ये संवेदनशील सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। और पहली बार यहां हाई एनर्जी न्यूट्रिनो 2013 में ही डिटेक्ट किए गए थे।

हाल्ज़ेन और उनके सहयोगियों ने दिखा दिया कि अगर यकीन के साथ विज्ञान भी पक्का हो, तो अदृश्य कणों को भी पकड़ा जा सकता है।

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