
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं और उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने पहली बार एक ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (BSS) को निर्माण प्रक्रिया के दौरान देखा है। यह दुर्लभ अवसर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण देता है कि ऐसे तारे कैसे बनते हैं।
‘ब्लू स्ट्रैगलर स्टार्स’ तारा समूहों में पाए जाने वाले ऐसे तारे होते हैं, जो अपने समकक्ष तारों की तुलना में अधिक गर्म, चमकीले और अधिक विशाल दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का लंबे समय से मानना था, कि ये अपने साथी तारे से पदार्थ खींचकर बड़े बनते हैं, लेकिन अब तक इसके सीधे सबूत नहीं मिले थे।
इनकी निर्माण प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने कोलिंडर 261 नाम के पुराने तारा समूह में, एक तारा तंत्र का अध्ययन किया। क्योंकि TIC 327546480 नाम के इस Binary star system के गुणों से, दोनों तारों के बीच निरंतर परस्पर क्रिया का संकेत मिल रहा था।
अध्ययन में NASA के TESS (Transiting Exoplanet Survey Satellite) मिशन और ESO के Very Large Telescope से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
वैज्ञानिकों को पता चला कि ब्लू स्ट्रैगलर तारा अपने साथी तारे से सक्रिय रूप से पदार्थ ग्रहण कर रहा है, जिससे उन्हें एक Blue Straggler Star के निर्माण की प्रक्रिया का दुर्लभ नज़ारा देखने को मिला।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस Blue Straggler Star का द्रव्यमान सूरज से लगभग 1.67 गुना है, जबकि उसके साथी तारे का द्रव्यमान सूरज का लगभग 0.32 गुना ही है। और ये दोनों तारे हर 50 घंटे 38 मिनट में एक-दूसरे का एक पूरा चक्कर लगा लेते हैं। इस अध्ययन को Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित किया गया है।

