साल 2026 की शुरुआत में Hubble ने M94 के पास एक अनोखे बादल की पुष्टि की। क्लाउड 9 – 4,900 प्रकाश वर्ष तक फैले इस बादल में 10 लाख सूरज के बराबर गैस है और 50 लाख सूरज के बराबर डार्क मैटर…परंतु तारे नहीं है। जैसे ईंट भी हो और सीमेंट भी, पर मकान न बन पाए।
वैज्ञानिकों ने इसे नाम दिया है Reionization-Limited H I Cloud, (RELHIC)। यानी एक असफल या फेल्ड गैलेक्सी। जो ब्रह्मांड की शुरुआत में रीआयनाइज़ेशन की गर्मी के कारण, कभी तारे नहीं बना पाई।
इसकी खोज चीन के फास्ट टेलीस्कोप ने की थी। फिर ग्रीन बैंक और VLA रेडियो टेलीस्कोप ने भी इसे देखा। और हबल के एडवांस्ड कैमरा फॉर सर्वे ने कंफर्म किया कि इसमें तारों का कोई संकेत नहीं है।
अब वैज्ञानिकों की एक नई टीम ने दुनिया के सबसे बड़े ऑप्टिकल टेलीस्कोप GTC का इस्तेमाल करते हुए फिर से इन्हीं नतीजे को दोहराया है। वैज्ञानिकों ने HiPERCAM से 5 फिल्टरस में, पिछली तस्वीरों से 10 गुना गहरी तस्वीरें लीं। परंतु इनमें भी उन्हें तारे होने का कोई संकेत नहीं मिला।
वैज्ञानिकों की कैलकुलेशन के मुताबिक अगर इस फैलाव में तारे हैं भी.. तो उनका वज़न केवल 16000 सूरज के बराबर है। जबकि मौजूदा गैस 10 लाख सूरज के बराबर है। कुल मिलाकर 60 गुना ज़्यादा गैस का होना तारा-विहीन आकाशगंगा का सबसे पक्का सबूत माना जा सकता है।
और यही बात इसे डार्क मैटर की स्टडी के लिए ख़ास बनाती है। क्योंकि यहां तारों की रोशनी का शोर नहीं है, इसलिए डार्क मैटर नापने की यह सबसे साफ़ प्रयोगशाला है। इस असफल गैलेक्सी से पता चल सकता है कि मिल्की वे जैसी सफल आकाशगंगाएँ कैसे बनीं?

