fbpx
News Research

भारतीय मूल के वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार

 

Indian-origin climate scientist wins 2026 Crafoord Prize.

‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज’ ने 2026 के क्रैफोर्ड पुरस्कार के लिए भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को चुना है।

Crafoord Prize in Geosciences के तहत, 82 वर्ष के वीरभद्रन रामनाथन को करीब 9 लाख अमेरिकी डॉलर और Gold medal से सम्मानित किया जा एगा।  स्टॉकहोम में एक कार्यक्रम के दौरान यह सम्मान उन्हें मई 2026 में  दिया जाएगा।

रामनाथन का जन्म तमिलनाडु के मदुरै में हुआ और भारत में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। फिलहाल, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो में कार्यरत रामनाथन 1970 के दशक से जलवायु परिवर्तन पर शोध कर रहे हैं।

अपने करियर के शुरुआती दौर में ही उन्होंने यह साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स (CFCs) शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों का काम करते हैं और ओज़ोन परत को नुकसान पहुंचाते हैं।

इस खोज ने वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के, औद्योगिक रसायनों के ग्लोबल वार्मिंग इफैक्ट्स को समझने के तरीके को, पूरी तरह से बदल दिया। क्योंकि तब तक यही समझा जाता था कि ग्रीन हाउस इफेक्ट के लिए केवल कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ते हुए स्तर ही जिम्मेदार हैं।

उनके शोध का असर इतना बड़ा था, कि इसके आधार पर Montreal Protocol  जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते बने। इन समझौतों की बदौलत दुनिया में लाखों टन हानिकारक गैसों को हवा में जाने से रोका गया।

‘सुपर-प्रदूषकों’ और वायुमंडलीय ‘ब्राउन क्लाउड्स’ पर दशकों तक किए गए उनके शोध ने न सिर्फ जलवायु परिवर्तन पर दुनिया की समझ को बदला, बल्कि विज्ञान और समाज दोनों को प्रभावित किया।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like