
उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क का कमज़ोर होना आम बात माना जाता है। याददाश्त कम होने लगती है। लोग अक्सर भूल जाते हैं कि उन्होंने कहां पर क्या रखा है।
दरअसल, उम्र बढ़ने के साथ दिमाग़ में सूजन बढ़ने लगती है, जिसे Neuro-inflammaging कहा जाता है, और यही सूजन दिमाग़ की कोशिकाओं को ठीक से काम नहीं करने देती। और मस्तिष्क की ऐसी ही इन्फ्लेमेशन डिमेंशिया और Alzheimer’s जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआत भी हो सकती है।
इसी तथ्य को सामने रखते हुए, Texas A&M University के वैज्ञानिकों ने एक ख़ास नेज़ल स्प्रे विकसित किया है, जो दिमाग़ की सूजन को कम करने और याददाश्त को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
इस नेज़ल स्प्रे की जान हैं लाखों सूक्ष्मजीवित कण, जिन्हें Extracellular Vesicles कहा जाता है। ये डिलीवरी व्हीकल की तरह काम करते हैं, जो माइक्रोआरएनए के पार्सल्स को नाक के ज़रिए सीधे दिमाग़ तक पहुँचाते हैं। और यही माइक्रोआरएनए मस्तिष्क के ऊतकों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
दिमाग़ में पहुँचकर ये पार्टिकल सूजन पैदा करने वाले सिस्टम NLRP3 और cGAS-STING को शांत कर देते हैं। इसके अलावा ये कोशिकाओं के पावरहाउस यानी माइटोकॉन्ड्रिया को मज़बूत बनाते हैं, जिससे कोशिकाओं को ज्यादा एनर्जी मिलती है और वो बेहतर काम करती हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रयोग में पाया गया कि दिन में दो बार इस स्प्रे के इस्तेमाल से, लोगों की याददाश्त मे सुधार होने लगा। और जिन लोगों पर इसका असर देखा गया, वो पुरानी और नई चीज़ों को पहले से ज़्यादा आसानी से पहचान पाए।
हालांकि अभी यह थेरेपी शुरुआती चरण में है, फिर भी यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इसमें किसी भी तरह का invasive procedure शामिल नहीं है। भविष्य में ऐसे इलाज मस्तिष्क को फिर से ऐक्टिव और मज़बूत बनाने में मदद कर सकते हैं।

