अब अंतरिक्ष की दुनिया में 108 अलग-अलग देशों की छात्राएं मिलकर नया इतिहास बनाने की तैयारी कर रही हैं। Mission ShakthiSAT के तहत छात्राएं मिलकर एक सैटेलाइट बना रही हैं, जिसे भारत के SSLV रॉकेट के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस पहल को दुनिया की सबसे बड़ी All-girls space initiative बताया जा रहा है।
Space Kidz India के नेतृत्व में Mission ShakthiSAT ने भारत में अपना Phase 2 पूरा कर लिया है। इस कार्यक्रम में दुनिया के अलग-अलग देशों की युवा छात्राओं और प्रतिनिधियों ने मिलकर सैटेलाइट तैयार करने में हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम का मक़सद सिर्फ़ किताबों या क्लासरूम में अंतरिक्ष को समझना नहीं है। इसमें छात्राओं को सैटेलाइट बनाने के साथ-साथ उसके अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने, इलेक्ट्रिकल सिस्टम तैयार करने, और पेलोड लगाने जैसे काम खुद करने का मौक़ा दिया गया है।
इस कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि 12U CubeSat का तैयार किया जाना है। यह एक छोटा सैटेलाइट होता है, जिसमें अलग-अलग वैज्ञानिक और तकनीकी उपकरण लगाए जा सकते हैं। इसे तैयार करने के दौरान छात्राओं को अंतरिक्ष मिशन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को क़रीब से समझने का मौक़ा भी मिला।
इस पहल में Egyptian Space Agency, University of South Alabama, Macquarie University, Indian Aerospace University और Space Kidz India समेत कई संस्थाएं एक साथ काम कर रही हैं।
Mission ShakthiSAT का लक्ष्य ज़्यादा से ज़्यादा लड़कियों को एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और स्पेस साइंस से जोड़ना है, ताकि वे अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

