
धरती का सबसे ठंडा महाद्वीप अंटार्कटिका काफ़ी लंबे समय से बर्फ से ढका हुआ है। लेकिन अब satellite data पर आधारित एक नई स्टडी से पता चला है, कि पिछले 30 सालों में यहां से इतने क्षेत्र की बर्फ पिघल चुकी है, जिसका आकार ग्रेटर लॉस एंजिलिस शहर के लगभग 10 गुना के बराबर है।
शोध में बताया गया है कि अंटार्कटिका की बर्फ एक सीमा पर टिकी रहती है, जिसे ग्राउंडिंग लाइन कहा जाता है। यह वही जगह है जहां ज़मीन पर जमी बर्फ समुद्र के पानी से मिलती है। और इसी लाइन से तय किया जाता है कि बर्फ ठहरेगी या समुद्र की ओर खिसकने लगेगी। शोध में पाया गया कि पिछले 30 सालों में वेस्ट अंटार्कटिका और अंटार्कटिक पेनिनसुला के कुछ ग्लेशियर 10 से 40 किलोमीटर तक पीछे खिसक गए हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह समुद्र का गर्म पानी है, जो धीरे-धीरे बर्फ को नीचे से पिघला रहा है। और यही बर्फ जब नीचे से कमज़ोर होने लगती है, तो ग्लेशियर टूटकर समुद्र में जाने लगते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, अंटार्कटिका का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा अभी भी स्थिर बना हुआ है, लेकिन जिन इलाकों में बर्फ तेज़ी से पिघल रही है, वहां ख़तरा बढ़ भी रहा है।
Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, अगर अंटार्कटिका की बर्फ इसी तेज़ी से पिघलती रही, तो भविष्य में दुनिया के तटीय शहरों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
याद रहे कि बर्फ की चादरों से ढका अंटार्कटिका पृथ्वी के प्राथमिक थर्मोस्टेट की तरह काम करता है। यह न केवल वैश्विक जलवायु, समुद्री धाराओं और समुद्र स्तर को नियंत्रित करता है, बल्कि एक विशाल ऊष्मा संगरक्षक के रूप में भी कार्य करता है।

