वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं, कि सूरज का बाहरी वायुमंडल जिसे कोरोना (corona) कहा जाता है, उसकी सतह से कई गुना ज़्यादा गर्म क्यों होता है?। क्योंकि आमतौर पर किसी भी गर्म चीज़ से दूर जाने पर तापमान कम हो जाता है, लेकिन सूरज में ठीक इसका उल्टा होता है। इसी रहस्य को समझने के लिए भारत के पहले सौर मिशन Aditya-L1 ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
इस मिशन के उपकरण विजिबल एमिशन लाइन कोरोनोग्राफ (VELC) से मिले आंकड़ों के आधार पर, Indian Institute of Astrophysics Bengaluru के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कोरोना को गर्म रखने का मुख्य स्रोत सूरज की मैग्नेटिक फील्ड्स का रिकनेक्शन है। जिसमें magnetic fields लगातार आपस में उलझती हैं, टूटती हैं और फिर से जुड़ जाती हैं।
अध्ययन के अनुसार इस प्रक्रिया में बहुत ज़्यादा ऊर्जा निकलती है, जो सूरज के कोरोना को, solar flares और कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) के बावजूद, बेहद गर्म बनाए रखती है।
यह निष्कर्ष इसलिए ख़ास हैं क्योंकि अब तक यह माना जाता था कि सूरज की गर्म सतह पर बनने वाली तरंगें ही कोरोना को गर्म रखने का मुख्य स्रोत हैं। परंतु नए अध्ययन से पता चला है कि ये तरंगें केवल 7% ऊर्जा ही देती हैं। यानी कोरोना के अत्यधिक तापमान के लिए सूरज की magnetic fields में होने interaction ही मुख्य रूप से ज़िम्मेदार है।
यह अध्ययन हमारे सूर्य की उर्जा बनाए रखने वाली गतिविधियों पर नया प्रकाश डालता है, जो हमारी पृथ्वी के अस्तित्व के लिए भी महत्वपूर्ण है।

