
18 जून 2026 को, राजस्थान के सांभर कस्बे से ताल्लुक रखने वाले प्रसिद्ध अमेरिकी वैज्ञानिक प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को 2025 के Wolf Prize in Physics से सम्मानित किया गया। 1978 में शुरू हुए वुल्फ पुरस्कारों के इतिहास में, भारतीय मूल के पहले वे वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भौतिकी के क्षेत्र में यह पुरस्कार मिला है।
Jerusalem में हुए एक औपचारिक समारोह में, प्रोफेसर जैन को यह पुरस्कार उनके स्वतंत्र और पूरक कार्य के लिए, दो अन्य वैज्ञानिकों के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। तीनों विजेताओं को डिप्लोमा तथा मेडल ऑफ ऑनर के साथ 100,000 डॉलर की संयुक्त पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
प्रोफेसर जैन ने 1989 में Composite Fermions का सिद्धांत पेश किया था, जिससे Fractional Quantum Hall Effect जैसे जटिल प्रभाव को समझना आसान हो गया। बाद के कई प्रयोगों ने उनकी इस खोज को सही साबित किया और आज Composite Fermions ‘कंडेंस्ड मैटर फ़िज़िक्स’ में एक बुनियादी कॉन्सेप्ट बन गए हैं। प्रोफेसर जैन अमेरिका जाने से पहले, Maharaja College Jaipur और IIT Kanpur के छात्र रह चुके हैं।
विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित प्रोफेसर जैन आज Pennsylvania State University में प्रोफेसर के रूप में कार्य कर रहे हैं, और उनकी खोज Quantum Computing और नई क्वांटम तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभा रही है। Jaipur prosthetic foot के साथ किया गया प्रोफेसर जैन का यह सफ़र, पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

