
2023 में चंद्रयान-3 की सफलता से इतिहास रचने के बाद, भारत अब जापान के साथ चंद्रयान-5 की तैयारियों को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है।
चंद्रयान-5 यानी लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) मिशन, भारत की Indian Space Research Organisation (ISRO) और जापान की Japan Aerospace Exploration Agency (JAXA) का संयुक्त lunar exploration project है।
हाल ही में बेंगलुरु के U R Rao Satellite Centre (URSC) में इन दोनों देशों के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इस परियोजना को लेकर एक बैठक की, जिसमें इस मिशन की तकनीकी तैयारियों पर चर्चा की गई।
इस बैठक में सबसे ज़्यादा चर्चा भारत के लैंडर और जापान के रोवर के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर हुई। ताकि चंद्रमा पर उतरने के बाद यह दोनों बिना किसी दिक्कत के आपस में संपर्क कर सकें और साथ मिलकर अपना काम कर सकें।
इसके अलावा जापानी रोवर में लगाए जाने वाले उपकरण भी चर्चा का विषय रहे जिनकी मदद से चंद्रमा की सतह का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। चंद्रयान-5 का उद्देश्य 2027-2028 के आसपास चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाकर जल-बर्फ़ भंडार और सतह के नीचे मौजूद वाष्पशील पदार्थों का अध्ययन करना है।
इस मिशन के ज़रिए वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि चंद्रमा पर पानी की बर्फ़ कितनी है, किन जगहों पर मौजूद है, और क्या आने वाले समय में उसका इस्तेमाल किया जा सकता है? भविष्य में अगर इंसान चंद्रमा पर लंबे समय तक रहना चाहे तो यही बर्फ़, पानी और ऑक्सीजन बनाने में मदद कर सकती है।

