
जल प्रदूषण की बढ़ती समस्या के बीच, वैज्ञानिकों को मीठे पानी के sponges में एक ऐसा प्राकृतिक समाधान मिला है, जो पानी से भारी और ज़हरीले धातुओं को हटाने में मदद कर सकता है।
कोलकाता स्थित बोस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने जब सुंदरबन डेल्टा के मीठे पानी में रहने वाले विभिन्न स्पंजेस पर अध्ययन किया, तो पाया कि ये स्पंज पानी में मिली हुई ज़हरीली धातुओं को अपने अंदर जमा करते हैं। और इस कार्य में उनकी मदद करते हैं इनमें पाए जाने वाले ख़ास बैक्टीरिया।
Microbiology Spectrum जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में सामने आया कि स्पंज के अंदर रहने वाले जीवाणु आसपास के पानी में मौजूद बैक्टीरिया से अलग होते हैं। इनमें ऐसे जीन पाए गए जो उन्हें जहरीली धातुओं और कठिन परिस्थितियों की मौजूदगी में भी जीवित रहने में मदद करते हैं।
फ्रेशवाटर स्पंज इन जीवाणुओं के साथ मिलकर, आर्सेनिक, सीसा और कैडमियम जैसे टॉक्सिक मेटल्स को पानी में से सोख लेते हैं, और पानी में मिली इन धातुओं के लिए बायो इंडिकेटर का भी काम कर सकते हैं।
सुंदरबन के मीठे पानी में पाए जानेवाले स्पंजेस में रहने वाले बैक्टीरिया पर किया गया, यह पहला विस्तृत अध्ययन है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है, कि इस अध्ययन से भविष्य में बिना रसायनों के पानी को साफ़ करने और पानी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के नए तरीक़े विकसित किए जा सकेंगे।

