
बेंगलुरु स्थित Astrobase Space Technologies ने अपने पहले fully integrated rocket engine Everest को हाल ही में पेश किया। प्राइवेट तौर पर बना यह भारत का पहला फुल-फ्लो स्टेज्ड कंबशन (FFSC) रॉकेट इंजन है। और इसके साथ भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद FFSC टेक्नोलॉजी वाला चौथा देश बन गया है।
लिक्विड ऑक्सीजन और लिक्विड मीथेन पर चलने वाले एवरेस्ट को space vaccum में करीब 800 किलो न्यूटन का थ्रस्ट उत्पन्न करने के लिए बनाया गया है। और इस इंजन की ख़ासियत है इसकी फुल-फ़्लो स्टेज्ड कंबशन तकनीक।
आम रॉकेट इंजन जहां आसान कंबशन साइकिल का इस्तेमाल करते हैं, वहीं ‘फुल-फ़्लो स्टेज्ड कंबशन इंजन’ में प्रोपेलेंट के मुख्य कंबशन चैंबर में जाने से पहले, फ़्यूल और ऑक्सीडाइज़र दोनों को अलग-अलग प्री-बर्नर सिस्टम से गुज़ारा जाता है। इससे इंजन ज्यादा दबाव पर भी बेहतर तरीके से काम करता है, और प्रोपेलेंट का बेहतर इस्तेमाल होता है।
Astrobase सितंबर 2025 में इस तकनीक से बने छोटे इंजन का सफल परीक्षण कर चुकी है। इसके अलावा High-speed propellant pumps की भी टेस्टिंग की जा चुकी है।
अब कंपनी आंध्र प्रदेश स्थित अपने टेस्ट सेंटर में Everest इंजन का पहला Full-Scale Hot-Fire Test करने की तैयारी कर रही है। कंपनी आगे चलकर कई Everest इंजन को जोड़कर एक मीडियम-लिफ्ट और दोबारा इस्तेमाल होने वाला रॉकेट बनाने की योजना बना रही है।
अगर Everest का Full-Scale टेस्ट सफल रहता है, तो यह भारत के बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर और Reusable Rocket Technology के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

