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रैटलस्नेक में मिले अनोखे प्रोटीन से बन सकता है प्रभावशाली एंटीवेनम

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वैज्ञानिक लंबे समय से ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जहरीले सांप अपने ही ज़हर से कैसे बचते हैं।?

यह समझने के लिए अमेरिका की University of Maryland के शोधकर्ता वर्षों से काम कर रहे हैं। Western Diamond-backed Rattlesnake के खून की जांच करते हुए शोधकर्ताओं ने FETUA-3 नाम के एक प्रोटीन की पहचान की थी, जो ज़हरीले टॉक्सिंस को रोकने में असरदार था।

अब नए शोध में वैज्ञानिकों ने, FETUA परिवार के कई प्रोटीन्स को अलग-अलग और फिर एक साथ टेस्ट किया है। पाया गया कि जहां अलग-अलग प्रोटीन कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं, वहीं कई प्रोटीन्स को मिलाने से ज़हर को न्यूट्रलाइज़ करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

लैब में किए गए टेस्ट में इस प्रोटीन मिश्रण ने रैटलस्नेक के ज़हर के असर को पूरी तरह से बेअसर कर दिया और वाइपर की दूसरी ज़हरीली प्रजातियों के ज़हर को भी न्यूट्रलाइज़ किया। यह प्रोटीन मिश्रण पारंपरिक तौर पर तैयार किए जाने वाले रैटलस्नेक एंटीवेनम की तुलना में लगभग 10 गुना ज़्यादा असरदार साबित हुआ।

फ़िलहाल, ज़्यादातर एंटीवेनम घोड़ों या भेड़ों की मदद से बनाए जाते हैं। इस प्रक्रिया में जानवरों को कुछ मात्रा में ज़हर दिया जाता है, और फिर उनके शरीर में तैयार ऐंटीबॉडीज़ से एंटी वेनम बनाया जाता है। लेकिन इसे तैयार करना महंगा होता है और इससे कुछ लोगों में एलर्जी का ख़तरा भी रहता है।

शोधकर्ता अब सांप के प्रोटीन से बनने वाले एंटी-वेनम की जांच सांपों के अलग-अलग तरह के टॉक्सिंस पर कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में ज़्यादा असरदार, सुरक्षित और कम महंगा एंटीवेनम तैयार किया जा सकेगा।

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