
2013 में, पृथ्वी से 57 प्रकाश वर्ष दूर, एक गुलाबी रंग के पिंड की खोज की गई थी, जो ज़मीन पर आधारित उपकरणों का उपयोग करके खोजा गया अब तक का सबसे ठंडा ग्रह जैसा पिंड माना जाता है।
परंतु GJ504b नाम का यह पिंड ज़मीन पर आधारित उपकरणों के लिए बहुत धुंधला साबित हुआ और इसके प्रकाश का विश्लेषण नहीं हो पाया। इसलिए इसका वायुमंडल एक दशक से ज़्यादा समय तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य ही बना रहा।
पर हाल ही में Northwestern University के एक भारतीय खगोलशास्त्री और उनके साथियों ने, जब James Webb Space Telescope की मदद से इस pink planet के स्पेक्ट्रम का अध्ययन किया, तो उन्हें इस पिंड के बारे में अनोखी जानकारी मिली।
डेटा से तो इसके एटमॉस्फेयर में जल वाष्प, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, अमोनिया और अन्य अणुओं सहित रसायनों का एक समृद्ध मिश्रण सामने आया। पर जब ये आंकड़े एस्ट्रोफिज़िकल मॉडल में डाले गए तो ऐसे पिंड के पुनर्निर्माण में भौतिक रूप से असंभव विशेषताओं से जुड़ी गड़बड़ी सामने आई। और यह समस्या तब दूर हुई जब शोधकर्ताओं ने नमक के बादलों को इस मॉडल में जोड़ा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी ठंडी ग्रह जैसी दुनिया में नमक के बादलों के इतने पक्के सबूत मिले हैं। उनका मानना है कि यह खोज दूर स्थित ग्रहों और उनके वातावरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी।
यह शोध अंतरिक्ष की गहराइयों का अध्ययन करने के लिए James Webb Space Telescope की क्षमताओं को भी पुनर्स्थापित करता है।

