क्या आपने कभी सोचा है, कि कबूतर जैसे पक्षी सैकड़ों किलोमीटर उड़ कर भी अपने घर का रास्ता कैसे ढूंढ़ लेते हैं?
वैज्ञानिक यह तो जानते हैं, कि माइग्रेटरी बर्ड्स और कबूतर नेविगेट करने के लिए कुछ हद तक पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड का सहारा लेते हैं। परंतु पक्षियों में ये मैग्नेटिक सेंसर कहां और कैसे काम करते हैं, यह अब तक एक अनसुलझी पहेली ही थी।
पर अब Science journal में प्रकाशित जर्मनी के एक अध्ययन ने इस रहस्य को उजागर करने की कोशिश की है।
शोधकर्ताओं ने कबूतरों में एक बड़े ही दिलचस्प तंत्र का पता लगाया है जिसके चलते कबूतरों का लिवर एक मैग्नेटिक सेंसर की तरह काम करता है। यानी पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड को महसूस करने के लिए कबूतर अपनी आंखों या दिमाग़ की बजाय लिवर का सहारा लेते हैं, जो इंटरनल कंपस की तरह काम करता है।
दरअसल कबूतरों के लिवर में मौजूद मैक्रोफेज रुपी इम्यून सेल्स पुराने red blood cells को हटाने का काम करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान इनमें आयरन जमा होता रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही आयरन चुंबकीय संकेतों को महसूस करने में मदद करता है।
शोध के दौरान जब इन सेल्स को हटाया गया, तो बादलों में कबूतर अपना रास्ता नहीं पहचान पाए। हालांकि, जब सूरज दिखाई दे रहा था, तब वो सूरज की दिशा देखकर आसानी से घर वापस आ गया।
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि लिवर में मौजूद ये iron-rich cells, nerve fibres के बहुत करीब होते हैं, जिससे चुंबकीय जानकारी मस्तिष्क तक ले जाने में मदद मिलती है।
यह शोध पक्षियों में नेविगेशन की क्षमता को समझने के लिए एक नया नज़रिया सामने रखता है, और इससे दूसरे जानवरों में भी ऐसी क्षमताओं का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।